हम खुद की जिंदगी जीते हैं, लेकिन कभी कभी खुद की जिंदगी जाते जीते हम लोगों के लिए जीना शुरु कर देते है, जैसे सभी जाते हैं, जैसे सभी कहते है, जैसे सभी चाहते हैं, हम वैसे जीने लग जाते हैं, हम वैसे फैसले लेने लग जाते हैं। ऐसे फैसले लेते लेते हम, खुद को खुद से पीछे छोड़ देते हैं। ऐसा ही एक किस्सा मैं यहाँ सुना रही हूँ ।