साधारणतः हम दिल और मन को एक मानते है, जब की वो होते अलग अलग है । हमारे स्वध्याय गुरू श्री अक्षय जी भैया जी ने दिल,दिमाग और मन कि अलग अलग विशेषताऐ बतलाई है और उसीको आधार लेकर प्रस्तुत हैं मेरी नई रचना दिल,दिमाग और मन।।
पसंद आऐ तो 5 नये लोगों के साथ share करेऔर अपने विचार अवश्य व्यक्त करे।।
"#खुशहाल 😊😊"