1947 में मानिकशॉ ने 1000 रुपए में अपनी मोटरसाइकिल याहिया को बेच दी. याहिया ने वादा किया कि वो पाकिस्तान जा कर पैसा भेजेंगे. लेकिन वहाँ जा कर वो इसके बारे में भूल गए. 1971 की लड़ी के बाद सैम ने मज़ाक किया "मैंने याहिया ख़ां के चेक का 24 सालों तक इंतज़ार किया लेकिन वह कभी नहीं आया. आखिर उन्होंने 1947 में लिया गया उधार अपना आधा देश दे कर चुकाया."