माँ बाप वो कमान हैं जिससे बच्चे के रूप में तीर निकलता है | यही धरती पे जीवन की नित्य चलते रहने की और Evolution की और आगे बढ़ने की प्रक्रिया है| यही प्रकृति का खेल है, नियति है | माता पिता को केवल दिशा निर्देश के साथ तीर छोड़ देना है| तीर स्वयं आगे जाएगा और heat seaking missile की तरह निशाने पे लगेगा ही लगेगा| उसको नियति पे छोड़ दो | उसके मैनेजर मत बनो | उसके रखा बनो| वो तीर तुमसे निकल के आगे ही जाएगा, पीछे नहीं|