इस एपिसोड में आयुष भाव के अर्थ (भाव) की बात करते हैं | जैसी आपकी समझ और अनुभव, वैसे ही आपका भाव | योगः क्या है? जुड़ जाने को ही योगः बोला गया| आयुष यहाँ से सह-अस्तित्व से जुड़ जाने के ध्यान की ओर, अपनी चेतना पर ध्यान की ओर लेकर जाते हैं, जो की अगले एपिसोड में भी continued रहेगी |
Additional note: आत्मा हमेशा जागृत होती ही है| दृष्टा पद में होती है| सारा अनुभव यही देखती है और साथ में अनुभव की अभिव्यक्ति भी यही देती है | आत्मा से जुड़ा मन आशा, विचार, इच्छा, संकल्प की शक्ति से संचालित होकर शरीर की इन्द्रियों के माध्यम से संसार को देखता है, चखता है, और जीने के लिए शरीर को क्रिया कार्य के लिए आउटपुट भी देता है | चेतना आत्मा और मन की संयुक्त क्रिया का नाम है | ये गहरी नींद में सोई सी होती है| गहरी नींद में शून्यता होती है | गहरे ध्यान में जब इन्द्रियां inactive होती हैं और मन की क्रियाएं भी शून्य हो जाती हैं, तो उसी शून्यता का "जागृत दर्शन" हो जाता है | आत्मा शून्य (दूसरा नाम परमात्मा) के समान ही है | आत्मा के इसी शून्यता के पर्दे पर मन, शरीर और संसार का अनुभव होता है |