महिलाओं पर बंदिशों, पुरुष प्रधान समाज के नियमों, यौनिकता, रजोनिवृत्ति जैसे कई टैबू समझे जाने वाले विषयों पर कमला दास लगातार लिखती रहीं और आलोचना की शिकार होती रहीं.