खज़ाने की खोज़ ना जाने लोगो से क्या से क्या करा देती हैं। ये अपनों को पराया और पराए को दुश्मन बना देती हैं। क्या विजय, अजय, सुनीता और अज्ञात प्रोफेसर खज़ाने को ढूंढने में सफल हुए? क्या उस रहस्यमई किले से वो बच कर निकल पाए? क्या आज के ज़माने में भी खज़ाने जैसी चीज़ होती हैं? जानने के लिए सुनना ना भूले अरुण रावत सूर्यसारथी की ये रोमांच और भय से भरी ये कहानी ' खज़ाने की खोज़' जिसे जीवित कर के आवाज़ दी है ह्रिट्ज ने।