18वीं एवं 19वीं शताब्दी में ये लोग सिर्फ लूट-मार करते थे। पानीपत के तीसरे युद्ध के पश्चात ये लोग मालवा में बस गये तथा सिंधिया, होल्कर एवं निजाम के सहायक ... आगे पढ़ें ..