दिल मेरे तू डर नही
जो सामने सहर नही
कुछ रास्तों पे चलने को
सूरज नही जरूरी ।
कदम कदम सवाल कर
न धीमी अपनी चाल कर
जवाब ढूंढते हुए
रुकना नही जरूरी।
तुझे थोड़ी जो थकान हो
और पास में मकान हो
रुक जा तू थोड़ी देर पर
बसना नही जरूरी ।
रहता कहाँ था याद रख
कुछ ठोकरों का स्वाद चख
तोहफ़े में गर चोटें मिले
बचना नही जरूरी ।
रुकना कहाँ है सोच मत
तू आत्मा को नोच मत
अपने ही ख्वाबों के लिए
बिकना नही जरूरी ।
लोगों के पैर से उड़ी
धूल में है जिंदगी
आसमाँ को हर समय
तकना नही जरूरी।
दिल मेरे,
थोड़ी देर में खुद ब खुद
आ जाएगी तेरी सहर
तू चाहे गर तो रोक ले
थोड़ी देर ये सफ़र,
जो शाम हो तो फिर कहीं
सिगड़ियों पे कुछ पका
बहती नदी के पानी मे
सफर के ज़ख्म दे डुबा;
रात की मांद में सुकून से
सो सितारे ओढ़ के
कल भी सफर है,उससे पहले
सोना है जरूरी।
विदित