“नाम साधना” की कुछ अनुभूतियों में से अपनेआप उभरा ये भक्तिगान, जिस तर्ज में उभरा उसी में गा कर इसे podcast करने की ये कोशिश है. आशा है ये गीत आपको भी आनंद दे, उतना ही जितना इसने और इसके तात्पर्य ने मुझे आनंदित किया है.
http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2009/05/chakar-tera-hun-kacrb.mp3
पल पल जपूँ मै तेरा नाम….!
पल पल जपूँ मै तेरा नाम,
चरणों में तेरे मेरा धाम ….
साँवरे, साँवरे …….!
तू ही है दाता मेरा,
तुझसे ही नाता मेरा,
औरों से है क्या काम,
चरणों में तेरे मेरा धाम ….
साँवरे, साँवरे …….!
जो काम सामने आये,
तूने ही हैं भिजवाये,
अर्पण करुँ मै तेरे नाम,
मेरे सारे काम …
चरणों में तेरे मेरा धाम ….
साँवरे, साँवरे …….!
मेरी न चिंता मुझको,
मेरी है चिंता तुझको….
मेरी जो चिंता तुझको,
क्यूँ मैं डरूँ भी किसीको,
चाकर तेरा हूँ भगवान ,
चरणों में तेरे मेरा धाम ….
साँवरे, साँवरे …….!
पल पल जपूँ मै तेरा नाम,
चरणों में तेरे मेरा धाम ….
साँवरे, साँवरे …….!
—- “ विश्व नन्द “ —-