http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2014/12/gift-hamper-2.wma

गिफ़्ट हैंपर सी ज़िन्दगी ठहरी

रंगारंग वर्क़ में धरी ठहरी

जान के चाँद था लिया जिसको

सिर्फ चमकीली तश्तरी ठहरी

जिसकी हसरत ने बेक़रार रखा

ख़्वाब ही वो हसीं परी ठहरी

बैठ उड़ना था जिसपे वो कालीन

एक मामूली सी दरी ठहरी

चख के जिसको कि जी हुआ खट्टा

ऐसी रंगीन रसभरी ठहरी

जिनकी ज़िंदादिली के चर्चे थे

रूह उनकी तो अधमरी ठहरी

कुछ न होना हवाना है इससे

शायरी सिर्फ शायरी ठहरी

पेड़ अंदर से खुश्क़ था पाया

शाख जिसकी हरी भरी ठहरी