करती हूँ महसूस अपने करीब तुम्हे ऐसे दिल के पास है धड़कन जैसे छूती हैं बहती हवाएँ मुझे ऐसे छू लिया हो तुमने ठंडे हाथों से जैसे उड़ती हुई लटें चेहरे पर मेरे सवाँर रहे हो तुम ऐसे फूलों के कोमल पल्लव पर सरसराती हैं तितलियाँ जैसे सुनकर हंसी तुम्हारी लगता है मुझे ऐसे चिड़ियों ने बांधे हो पग मे घुंगरू जैसे आईने मे देखकर शर्माने लगी हूँ ऐसे देख रहे हो एकटक होकर मुझे तुम जैसे मिलने की चाह बढ़ती जा रही है ऐसे बढ़ती है सूरज की तपिश जैसे जाने ये क्या और हो गया मुझे कैसे राधा को था शाम से जैसे