प्रिय आत्मन् .........तुम्हें खारिज़ करने के सभी कारण मौजू़द हैं। तुम्हारी सक्रियता भी तुम्हें खारिज करवा सकती है और निष्क्रियता भी। जवानी में ही तुम्हारा ज्ञानवृद्ध हो जाना, शरीरवृद्धों के लिए तुम्हें निरस्त करने का कारण हो सकता है। तुम आध्यात्मिक हो तो भी खारिज़ हो सकते हो। तुम खूब भौतिक भोगवादी हो तो भी लांछन तैयार हैं। बस तुम अपना दृष्टिपथ यानी विज़न कहाँ से लेते हो, यह महत्वपूर्ण है। तुम्हारी उठी हुई भुजाओं में कोई भी तख़्ती देकर चलता बनेगा। तुम्हारा ..........चिर