4 जनवरी को शास्त्री जी वार्ता के लिए ताशकंद के पहुंचे.यहां समझौते में तय किया गया कि सीमा को लेकर जंग से पहले दोनों देशों की जो स्थिति थी, वही बनी रहेगी। इसके तहत दोनों देशों की सेनाओं अपनी-अपनी सीमाओं में लौटना पड़ेगा.पहले भारत इसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हुआ…हालांकि लंबी बातचीत के बाद 10 जनवरी को शास्त्री जी मान गए कि पाकिस्तान से जीते गए सारे इलाके लौटा दिए जाएंगे, जबकि पाकिस्तान ने “नो वॉर क्लॉज” को भी नहीं माना।10 जनवरी, 1966 को शास्त्री जी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। देश के लोगों को लगा कि वे जीती हुई बाजी हार गए हैं। ऐसे में इस समझौते के कारण शास्त्री जी से सिर्फ देशवासी ही नहीं, बल्कि उनका अपना परिवार भी नाराज हो गया था।