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कोप 26 या कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज या यूनाइटेड नेशन्स क्लाइमेट चेंज कांफ्रेंस में ईधन के रूप में कोयले के इस्तेमाल को कम करने को लेकर संकल्प लिए गए थे। परंतु यूक्रेन युद्ध से परंपरागत ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति में आई बड़ी रुकावट ने कोयले के उपयोग को बढ़ा दिया है। स्थितियों के मद्देनजर भारत ने कोप-27 में प्रस्ताव रखा है कि केवल कोयले में कटौती करने की जगह, सभी जीवाश्म ईंधनों पर चरणबद्ध तरीके से कटौती की जाए। भारत के इस प्रस्ताव के दो कारण हैं –
1) प्राकृतिक गैस और तेल भी ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिए उतने ही दोषी हैं।
2) भारत को कोयले पर अत्यधिक निर्भरता के लिए अक्सर लक्ष्य किया जाता है। यह अन्यायपूर्ण है।
भारत के प्रस्ताव कितने खरे –
इस वर्ष वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के रिकार्ड स्तर पर पहुंचने की आशंका है। इन स्थितियों में भले ही कोयले पर हमारी निर्भरता खत्म न हो, लेकिन 2040 तक इसे क्रमशः कम से कमतर स्थिति पर लाया जा सकता है। इससे बाहर निकलने में स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल पर भारत की नजर होनी चाहिए।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 14 नवंबर, 2022
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