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विश्व बैंक की माइग्रेशन एण्ड डेवलपमेंट की संक्षिप्त रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भारत के प्रवासी कामगार विदेशों से 100 अरब डॉलर तक भेजने की क्षमता में हैं। यह अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है।
इससे संबंधित कुछ बिंदु –
वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर है। बढ़ती मंदी के साथ चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका बनी हुई है। आई टी कंपनियों में बढ़ते खिंचाव से भारत के सॉफ्टवेयर क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है। अतः बढ़ते व्यापार घाटे को सॉफ्टवेयर निर्यात या इन्वार्ड रेमीटेन्स से नहीं पाटा जा सकेगा। इसलिए भारत को रेमीटेन्स में बढ़ोत्तरी के लिए विकसित देशों के साथ वर्कर वीजा पर तेजी से काम करना चाहिए।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 2 दिसम्बर, 2022
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