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हमारे देश में विदेशी पर्यटकों के साथ होने वाले तरह-तरह के अपराधों की सुचनाएं मिलती ही रहती हैं। अगर राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो भले ही वर्ष दर वर्ष इनका प्रतिशत घटता दिखाई देता है, लेकिन इसके पीछे अनेक कारण हो सकते हैं –
– महामारी के कारण पर्यटकों की संख्या का कम होना या
– अपराध का पंजीकरण न होना।
इसका यह अर्थ कदापि नहीं लगाया जा सकता है कि देश में विदेशियों के प्रति होने वाले अपराधों में कमी आ गई है। ऐसे अपराध वैश्विक स्तर पर देश की छवि को धूमिल करते हैं। आर्थिक नुकसान भी पहुँचाते हैं। कुछ आंकड़े –
इस हेतु पर्यटन मंत्रालय ने पुलिस रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट ब्यूरो के साथ मिलकर पर्यटकों के लिए पुलिस के विचार को साकार करने की योजना तैयार की है। कुछ बिंदु –
इसके अलावा भी जरूरी है कि विदेशी पर्यटकों के मन में भारत-भ्रमण को लेकर एक प्रकार की सुरक्षा का भाव भर दिया जाए, जिससे कि वे भारत आने में न हिचकें, और जब देश छोड़कर जाएं तो अच्छी छवि लेकर जाएं। पर्यटकों का भारत आगमन थोड़े समय के लिए होता है। इसलिए यह भी जरूरी है कि इनसे जुड़े अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएँ। इससे भारत की छवि और भी बेहतर हो सकती है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित एम.पी. नथेनल के लेख पर आधारित। 8 दिसबंर, 2022
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