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हाल ही में केंद्रीय कानून मंत्री ने मुख्य न्यायाधीश से लिखित मांग की है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में कार्यपालिका को भी स्थान दिया जाना चाहिए। फिलहाल यह प्रक्रिया न्यायाधीशों का कॉलेजियम ही संपन्न करता है।
सरकार की मांग के कुछ बिंदु –
यह आश्चर्य की बात है कि सरकार एक ऐसी न्यायपालिका पर लगाम लगाना चाहती है, जो हाल के कुछ वर्षों में सरकार के प्रति काफी उदार रही है। इसका एकमात्र निष्कर्ष यह है कि वर्तमान शासन, इस देश में अपने न्यायाधीशों की नियुक्ति चाहता है। इस कारण ही सरकार न्यायपालिका द्वारा प्रस्तावित नामों पर कई बार पुनर्विचार के बहाने कार्रवाई में देर करती रहती है। चाहे कुछ भी हो, सरकार का ऐसा प्रयास, लोकतांत्रिक कामकाज के लिए सही नहीं कहा जा सकता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए नियंत्रण और संतुलन जरूरी है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 19 जनवरी, 2023
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