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हमारे पर्वतीय पर्यटन स्थल बढ़ते ट्रैफिक से काफी समय से घुटन का अनुभव कर रहे हैं। यही नहीं, इन क्षेत्रों में बढ़ता प्लास्टिक कचरा, कई वन्य पशुओं का उन्मूलन और दक्षिण भारतीय नीलगिरी वनों में हाथियों का अवैध शिकार, बिजली के तारों से हाथियों की मौत, रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौत चिंता का विषय हैं। इन मुद्दों पर दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय दिए है।
सुरम्य और सुखद जलवायु वाले सभी पर्वतीय स्थल पिछले कुछ दशकों से अपने बुनियादी ढांचे पर दबाव से निपटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दूसरी ओर इनकी अर्थव्यवस्थाएं पर्यटन पर निर्भर करती है। ऐसे में मद्रास उच्च न्यायालय का यह प्रयास प्रशंसनीय है। आशा है कि इन स्थलों से जुड़े राज्य स्थायी पर्यटन, और पर्यावरण की सुरक्षा को सक्षम करने के उपाय सुनिश्चित करेंगे।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित मोहम्मद इमरानुल्लाह एस के लेख पर आधारित। 3 अप्रैल, 2024
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