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विश्व में होने वाले युद्धों की परंपरा कोई नई नहीं है। लेकिन वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र एवं मानवाधिकार जैसी वैश्विक संस्थाओं के होते हुए रूस-यूक्रेन, इजरायल-फिलिस्तीन-ईरान में चलते चले जा रहे युद्धों का कारण क्या है?

राजनीतिक सैन्य औद्योगिक गठजोड़ – हथियार कंपनियों को युद्धों से लाभ होता है। ये कंपनियां राजनीतिक दलों को अच्छा खासा चंदा देती हैं। नौकरियों का सृजन करती हैं। इसलिए सत्ताधारी दल पर इनका प्रभाव होता है।

बाइडन को देखें – युवा डेमोक्रेट्स के विरोध के बावजूद, बाइडन इजरायल को हथियार भेजना जारी रखे हुए हैं। वे युद्ध का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों की बात भी सही ठहराते हैं। लेकिन दूसरी ओर डरते हैं कि हथियारों की सप्लाई बंद करते ही उनका चुनाव अभियान खतरे में पड़ सकता है।

अफ्रीका की स्थिति – पूरा महाद्वीप हथियारों और संघर्षों से भरा पड़ा है। विश्व की सभी प्रमुख हथियार निर्माता कंपनियों की मौजूदगी यहाँ है। रूस, चीन, अमेरिका और फ्रांस बड़ी मात्रा में यहाँ हथियार सप्लाई करते हैं।

वैश्विक हथियार उद्योग आज पहले से कहीं अधिक शक्तिशाली है। और जब इसके हित नेताओं के हितों से जुड़ते हैं, चाहे वे लोकतंत्र में हो या निरंकुशता में, तो युद्ध बड़ा व्यवसाय बन जाता है, और मौतें महज आंकड़े बन जाती हैं।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 2 अप्रैल, 2024

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