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विश्व बैंक ने अपनी एक नवीन रिपोर्ट में कहा है कि यदि धनी राष्ट्र मांस एवं डेयरी उद्योग को प्रोत्साहन देने की बजाय उन पर अंकुश लगायें, तो जलवायु संकट से उबरने में सहायता मिल सकती है। विकसित राष्ट्रों को चाहिए कि वे पशुधन फार्मिंग को दी जाने वाली आर्थिक मदद में कटौती करें।

एग्रीफूड उद्योग विश्व के एक-तिहाई ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन करते हैं।

विश्व के लगभग तीन अरब से भी अधिक जुगाली करने वाले पशु भारी मात्रा में मीथेन का उत्पादन करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के अनुसार सन् 1960 के दशक की तुलना में वर्तमान में मांस की खपत दुगुनी हुई है। यह धनी देशों में बहुत अधिक है।

इसलिए विश्व बैंक का कहना है कि खाद्य व्यवस्था को सही करना आवश्यक है। यह जलवायु संकट का एक बड़ा कारण है।


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