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भारत वैश्विक आप्रवासी कार्यबल बाजार में देर से प्रवेश कर रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था अब पुरानी हो चली है। इसमें श्रमिकों के आवागमन की एक स्थापित व्यवस्था है। कल्याण कार्यक्रमों की भी एक व्यवस्था है। भारत के पास इनमें से कुछ नहीं है। फिर वह कुशल वैश्विक प्रतिभाओं को अपने यहाँ कैसे आकर्षित कर सकता है?
कुछ बिंदु –
एआई के वर्तमान दौर में भारत में उच्च स्तरीय प्रतिभाओं की मांग बढ़ना तय है। यहाँ का कार्यबल अत्यधिक कुशल नहीं है। युवा जनसंख्या की उम्र बढ़ने के साथ ही प्रतिभावान वैश्विक आप्रवासियों की जरूरत भारत को भी पड़ेगी। इसके लिए अभी से तैयारी में आव्रजन नीति की समीक्षा की जानी चाहिए।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 1 मई, 2024
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