*To Download Click Here.***
भारत का हिमालयी क्षेत्र भारत की जलापूर्ति का मुख्य स्रोत होने के साथ-साथ अमूल्य पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े उपहार और सेवाएं भी देता है। इस समझ के बावजूद, विशेष विकास आवश्यकताओं और हिमालयी क्षेत्र में चलाए जा रहे विकास मॉडल के बीच भारी मतभेद रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय के कुछ हालिया निर्णयों से यह राहत मिलती है कि हम एक अधिक मजबूत अधिकार आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ सतत विकास एक मौलिक अधिकार होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के इन निणयों और जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से मुक्त होने के नए मौलिक अधिकारों को देखते हुए, यह जरूरी है कि भारतीय हिमालयी क्षेत्र में वृद्धि और विकास की आकांक्षाओं को विज्ञान और लोगों तथा प्रकृति के अधिकारों के साथ जोड़ा जाये।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित अर्चना वैद्य के लेख पर आधारित। 25 जून 2024
The post हिमालयी विकास और प्रकृति तथा लोगों के अधिकारों के लिए न्यायालय द्वारा प्रशस्त मार्ग appeared first on AFEIAS.