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हाल ही में केंद्र सरकार ने अनुभवहीन श्रमिकों के रोजगार को सब्सिडी देने की योजना प्रस्वावित की है। यह योजना वंचित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा दे सकती है।

कुछ बिंदु –

इस कार्यक्रम का उद्देश्य सालाना 1 करोड़ नए श्रमिकों को लाभ पहुंचाना है।

प्रवेश स्तर के श्रमिकों को बाद में बिना सब्सिडी वाले रोजगार से जोड़ा जाता है, जिससे उनकी दीर्घकालिक नौकरी की संभावनाएं बेहतर होती हैं। पहले की सरकारों ने भी कार्य के अनुभव और श्रमिकों को आय का साधन देने के लिए ऐसी सब्सिडी दी थी।

अनुभवजन्य साक्ष्य बताते हैं कि इस कार्यक्रम का लाभ, कार्यक्रम की अवधि से अधिक समय तक प्राप्त किया जाता है।

कुछ कमियां –

इस योजना में किए जाने वाले रोजगार सृजन का स्वरूप ठीक नहीं है। अपेक्षित परिणाम देने के लिए सभी रोजगार को गैर कृषि अर्थव्यवस्था के औपचारिक हिस्से में लाना होगा।

आधिकारिक अनुमानों के अनुसार अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 2 करोड़ रोजगार सृजन होता है। औपचारिक रोजगार कुल रोजगार का करीब दसवां हिस्सा है। इसका कार्यक्रम के नतीजों पर प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा, खपत में कमी के कारण निजी निवेश सुस्त है। इसका सीधा असर रोजगार सृजन पर पड़ता है। गति पकड़ने के लिए रोजगार सब्सिडी योजना की अवधि बढ़ानी पड़ सकती है।

द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 30 जुलाई, 2024

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