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  • विनिर्माण और सेवाओं में विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर के अलावा कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और तेलंगाना भी काफी आगे आ चुके हैं।
  • व्यापार की सुगमता, भूमि अधिग्रहण, कार्यबल की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे के आधार पर इन राज्यों ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
  • दक्षिण के तटीय राज्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने के लिए समुद्री व्यापार तक अपनी पहुँच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
  • दक्षिणी राज्य, अपने-अपने स्तर पर क्लस्टर विकसित कर रहे हैं। इससे चुनिंदा विनिर्माण निर्यात को संघीय प्रोत्साहन मिल रहा है।
  • दक्षिणी राज्यों को औद्योगीकरण के लिए उत्तरी राज्यों से सस्ते श्रमिक और उत्पादों के लिए बाजार मिल रहा है।
  • भारत को वैश्विक विनिर्माण बेस बनाने की दिशा में राज्यों के बीच मूलभूत सुविधाओं में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। लॉजिस्टिक की लागत घट रही है। जीएसटी से एक समान कर संरचना बन गई है। राष्ट्रीय ग्रिड के निर्माण से बिजली की आपूर्ति एक समान है।

अतः राज्यों को सामाजिक बुनियादी ढांचे पर प्रतिस्पर्धा करने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य और शिक्षा के माध्यम से इसमें बढ़त ली जा सकती है।

‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 29 अगस्त, 2024

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