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परिचय –
बांस को ‘गरीबों की लकड़ी‘ तथा ‘हरा सोना’ कहा जाता है। इसमें किसानों की आमदनी बढ़ोत्तरी की संभावना देखते हुए सरकार ने “राष्ट्रीय बांस मिशन” तथा, एकीकृत बागवानी विकास मिशन को नए सिरे से शुरू किया है, जिससे देश में बांस की खेती को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
नीति आयोग का अनुमान है कि 2025 तक दुनिया में बांस का बाजार लगभग 98.3 अरब डॉलर का हो जाएगा। चीन के बाद भारत सबसे बड़ा बांस उत्पादक देश है।
भारतीय वन अधिनियम में संशोधन –
2017 में इसमें संशोधन कर बांस को पेड़ के बजाय घास की श्रेणी में डाला गया। इससे इसकी कटाई, ढुलाई तथा बिक्री पर लगे सभी तरह के प्रतिबंध हट गए।
अब अन्य फसलों की तरह इसकी भी खेती की जा सकती है। इसे बेचने के लिए न तो किसी लाइसेंस की जरूरत है और न ही वन विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी की अनुमति लेने की।
बांस के कुल उत्पादन का 50% पूर्वोत्तर भारत में होता है। यह मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, पश्चिमी- घाट आदि में भी होता है।
बांस की खेती से लाभ –
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