सुख हमारी प्रकृति है, वो पाने की वस्तु नहीं है और न ही कोई गंतव्य है, वो है, बस।दुःख हमें अपनी संकीर्णता मैं घसीटा रहता और अपनी प्रकृति से दूर करते रहता है। दुःख के होने का कारण होता है और उन कारण और उनके असर को काम करने के लिए सुदर्शन क्रिया और सहज समाधि ध्यान का अभ्यास करना होता है।