मेरे प्यारे वेद कबीर पॉडकास्ट को सुनने वालों नेत्र, नाक, जीभ, कान और त्वचा अर्थात् दृश्य, सुगंध, स्वाद, श्रवण और स्पर्श प्रिया श्रवण करता जिस विषय को मैं आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं उसे आप सब लोग देखते भी हैं सुनते भी हैं सोते भी हैं बोलते भी हैं पढ़ते भी हैं और उसका स्पर्श भी महसूस करते हैं लेकिन आप ना तो उसका विरोध करते और ना ही उसका कोई समाधान करते हैंआप जो सांस ले रहे हैं वह केमिकल्स और आर्सेनिक से भरी है आप जो पानी पी रहे हैं वह भी उतना शुद्ध नहीं है आप जिन मेट्रो सिटीज में रह रहे हैं वह सही मालूम है मौत के घर हैं जो धीमे जहर की तरह हम सभी की नसों में प्रवेश कर चुके हैं हमारे विचारों में उनका खास स्थान है हमारे फेफड़ों में वह उथल-पुथल मचा रहे हैं इस पॉडकास्ट को सुनने के बाद आपको आभास होगा की आप और आपके बच्चे कितने बड़े खतरे में जी रहे हैंऔर एक बात मैं आपको बता देता हूं हर महानगर के आसपास के गांव बिक चुके हैं या बिक रहे हैं जहां पर बिल्डर बिल्डिंग के उग रहे हैं और हमें ललित कर रहे हैं क्या हो गांव जैसा ही माहौल में फ्लैट खरीदो फार्म हाउस खरीदो