जम्मू कश्मीर राज्य राजनीतिक पहचान को बदले हुए तक़रीबन तीन महीने होने को हैं और इस दौरान घाटी में एक असामान्य किस्म की शांति है. ये शांति - स्वाभाविक है या थोपी हुई – ये वाले दिनों में साफ़ हो जाएगा. लेकिन, जो बात अभी साफ़ नज़र आ रही है वो है - राज्य में एक स्थानीय सरकार की कमी, राजनीतिक शून्यता, प्रशासनिक द्वंद और सुरक्षा को लेकर लोगों के मन में तमाम सवाल. इसके अलावा जो सबसे ज़्यादा अहम् बात वो है राज्य के लोगों के मन में जिस तरह से एक तरह का डर - घर कर गया है, वो जल्दी जाने वाला नहीं है. इन सभी विषयों पर क्रेंद्रित इस चर्चा में शामिल हुए ओआरएफ़ के एसोसिएट फ़ेलो - ख़ालिद शाह और स्वाति अर्जुन।