ये कविता पाठ श्री रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित रश्मिरथी से लिया गया है। यह रश्मिरथी का तृतीय सर्ग है। इस में वर्णन है कि भगवान कृष्ण पांडवों का शांति प्रस्ताव लेकर दुर्योधन के पास जाते हैं। दुर्योधन शांति प्रस्ताव स्वीकार नहीं करता है और उल्टा भगवान श्री कृष्ण को बंदी बनाने का प्रयास करता है। बहुत ही सुंदर वर्णन श्री रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी कविता रश्मिरथी में इस प्रसंग का किया है