मीडिया विश्लेषक खड़गे की पृष्ठभूमि देख रहे हैं और यही बात उनके विचारों पर हावी है. उनके विचारों में संतुलन नहीं है क्योंकि उनकी अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि का दबाव उन्हें संतुलित विश्लेषण करने से रोक रहा है.