अगले 10 दिनों में विपक्षी दलों के लिए यह जरूरी होगा कि मतदाताओं के मन में ये बात बैठा दें कि उनकी समस्याओं का समाधान वही कर सकते हैं. हो सकता है उन्हें पांचवां ‘एम’ मिल जाए जिसके बारे में पीके ने सोचा भी नहीं हो.