राजनीतिक दल अक्सर इन्हें अपने चुनावी अभियान की रणनीतियों के एक हिस्से के तौर पर इस्तेमाल करते आए हैं. मुंबई के फेरीवालों को भी पता है कि यह सिर्फ राजनीति हैं. उन्हें चुनावी वादों के पूरा किए जाने का इंतजार तो है मगर वो ज्यादा उम्मीद नहीं रखते हैं.