बिहार सरकार ने अदालतों पर बोझ कम करने के लिए पिछले साल मद्यनिषेध कानून में ढील दी थी. लेकिन पटना हाईकोर्ट और राज्य सरकार के बीच संघर्ष के कारण पहली बार अपराध करने वाले आरोपियों के 1.5 लाख से अधिक मामले सुनवाई के लिए अभी भी अटके हुए हैं.