मोदी सरकार एक ओर पश्चिम विरोधी और रूस समर्थक जनमत के निर्माण को प्रोत्साहित करती रही है, तो दूसरी ओर अपनी रणनीति इसके बिलकुल उलटी दिशा में निर्धारित करती रही है. ऐसे विरोधाभास चल नहीं सकते