उसके संस्थापक कभी बहुमत नहीं हासिल कर पाए और उन्हें बहुरंगी गठबंधनों को एकजुट रखने का करतब करते रहना पड़ा मगर आज मोदी-शाह की बदौलत उसे किसी सहयोगी की बैसाखी की जरूरत नहीं रही तो उन्हें अपने पुराने नेताओं, खासकर वाजपेयी का शुक्रगुजार होना चाहिए