राजनीति के अपराधीकरण के दौर से पहले देश में एक ऐसा भी वक्त था, जब कहा जाता था कि कोई भी व्यक्ति जन्म से अपराधी नहीं होता और जो व्यवस्था उसे अपराधी बनाती है, उसे उसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए.