सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 85% ड्रॉपआउट भारत के सिर्फ 11 राज्यों है. इन छात्रों की संख्या लगभग 30 लाख है. अपेक्षाकृत बेहतर पास प्रतिशत के बावजूद इन राज्यों में बंगाल और कर्नाटक शामिल हैं.