यह बात ज़ाहिर है कि हम जिस दुनिया में रहते हैं, वहां हर क्षेत्र में पुरुषों का ही वर्चस्व है. सदियों तक साहित्य में स्त्रियों को लिखने की इज़ाज़त नहीं थी और प्रेमचंद ने हमेशा अपनी पत्नी के लेखन को बढ़ावा दिया है.