स्थानीय लोगों का दावा है कि 31 जुलाई की सांप्रदायिक हिंसा के बाद शुरू हुआ विध्वंस अभियान नूंह में मुसलमानों को सबक सिखाने के लिए था. इससे पहले भी दूसरे राज्यों में इस तरह का पैटर्न देखा जा चुका है.