आज़ादी को 76 बरस हो गए हैं...तो वहीं, अपने वतन, आंगन को छोड़कर आए लोगों में से कुछ के मन में आज भी अपने मूल घरों को देखने की एक आस बची है...तो कुछ उस मंज़र को याद भी नहीं करना चाहते.