सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी ने यह जरूरत ऐसे समय पर महसूस की है जब छह हाई कोर्टों की तरफ से अपने खुद के यूट्यूब चैनल लॉन्च किए जा चुके हैं. हालांकि, अदालती कार्यवाही की लाइवस्ट्रीमिंग करना या न करना अदालतों की इच्छा पर निर्भर करेगा.