ओडिशा से लेकर कर्नाटक तक भाजपा 2019 के बाद से ही अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए संघर्ष कर रही है और इसके सहयोगी इसके विस्तारवादी मंसूबों के प्रति लगातार सावधान होते जा रहे हैं.