इलाहबाद HC ने पिछले महीने 1992 में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की याचिका ख़ारिज कर दी, जिससे अदालत में विचाराधीन मामले प्रकाश में आ गए. निचली अदालतों की कमी और न्यायिक रिक्तियां इसके पीछे एक बड़ा कारण हैं.