My First Counselor of 10th Class – Beny Sir :मैं आपसे अपने 10वीं की कहानी शेयर कर रहा हूँ
कहानी का निचोड़:
पैरेंट्स को रिज़ल्ट आने से पहले ही बच्चे के कैरियर की प्लानिंग कर लेनी चाहिए कैरियर काउन्सलर के साथ बैठकर न की दोस्तों और रिश्तेदारों के, क्यों कि बच्चे का भविष्य इस ही प्लानिंग पर टिका होता है.
छोटे शहर(tier3) के नॉर्मल बच्चों और पढ़ाकू बच्चों को बहुत कम एक्स्पोज़र होता है, इस लिए उन्हें personality development का कोर्स भी करना चाहिए.
बड़े शहरों में बच्चों के पैरेंट्स उन्हें क्लास 6 से ही कैरियर काउन्सलर कि गाइडेंस के अंदर रखते हैं ।
छोटे शहरों में 8 वीं पास करते ही पैरेंट्स और बच्चों को कैरियर काउन्सलर से बात कर लेनी चाहिए.
बच्चे कि केपेसिटी के हिसाब से उस पर वज़न डालना चाहिए.
भेड़ चाल से बचें – जो सब कर रहे हैं पता नहीं कि आपके बच्चे के लिए वो सही होगा कि नहीं.
भ्रम है, कि हिन्दी मीडियम वाले बच्चे कामियाब नहीं होते हैं.
हमें ज़िंदगी में बहुत से काउन्सलर्स कि ज़रूरत है, जैसे घर पर मम्मी या पापा और बाहर प्रोफेशनल कैरियर काउन्सलर.
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Dua from Allam Iqbal.
By Adnan Buland Khan
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