प्रबोधन मंच Radio: Recent Episodes

yuva prabodhan manch

युवा प्रबोधन मंच की सार्थक, सक्रिय और सामूहिक आवाज़

View Details

संदीप दीक्षित जी : आप पंद्रहवीं लोकसभा के सदस्य रहे हैं। आप पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली स्व. शीला दीक्षित जी के पुत्र हैं। आपका लोकसभा क्षेत्र दिल्ली ईस्ट रहा हैं। इसके अलावा आप Development 

Manager or Educator हैं और विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकार के कार्यों में अपनी सहभागिता उपलब्ध कराते हैं। युवा प्रबोधन मंच मध्यप्रदेश के माध्यम से आपसे सामाजिक सरोकार के विषय में मंच परिवार मुरैना का बेविनार के माध्यम से संवाद हुआ। बेविनार में संवाद का विषय रहा "सामाजिक सरोकार के कार्य और युवाओं की सहभागिता" विषय पर आपका महत्वपूर्ण उद्बोधन युवा प्रबोधन मंच की समस्त इकाईयों को प्राप्त हुआ।

तत्पश्चात परिचय होने के बाद मंच के सदस्यों ने विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्न

संदीप दीक्षित जी (पूर्व सांसद) Development Manager or Educator जी से किये :

युवा प्रबोधन मंच की कैलारस इकाई के समन्वयक गिर्राज सोलंकी जी और संयोजक आरिफ पठान जी ने सयुक्त रुप से  पूंछा कि समाज में सद्भाव बना रहे किसी को भी समाज में धार्मिक और जातिगत आधार पर अपमान का दंश न झेलना पड़े इस पर आप क्या विचार हैं ??

संदीप दीक्षित जी ने कहा- हमें शिक्षित और सभ्य समाज की रचना करनी होगी उस ओर हम सभी को मिलकर कार्य करना होगा। हमें समाज में आपसी भाईचारे का माहौल बनाना होगा किसी से भी धार्मिक और जातिगत आधार पर भेदभाव न करें यह प्रत्येक शिक्षित एवं सभ्य युवा की जिम्मेदारी है, अगर समाज को बांटने का वैमनस्यता बढ़ाने का यह घृणित कार्य कोई करता है तो आप सभी शिक्षित युवाओं को निर्भीक और निडर होकर आगें आना चाहिए जो लोग ऐसा करते हैं उनसे समाज को सतर्क करना चाहिए तभी हमारा आपसी भाईचारा और बंधुत्व में प्रेम और सौहार्द्र  रहेगा ।

जौरा इकाई से रवि कांत शर्मा- ने प्रश्न किया कि शासन कि कोई भी योजना जमीनी स्तर तक सही रूप से नहीं पहुंच पाती है क्या शासन का इस ओर भी कोई ध्यान देना चाहिए ??

संदीप दीक्षित जी ने कहा- निश्चित रूप से आपका यह प्रश्न बहुत ही महत्वपूर्ण है जो आपकी जागरूकता को भी दर्शाता है मुझे खुशी है कि प्रबोधन मंच मैं इस तरह के शिक्षित युवा और चिंतनशील युवा कार्य करते हैं। संदीप दीक्षित जी ने कहा कि निश्चित रूप से ऐसी योजनाओं के लिए शासन और प्रशासन को ध्यान देना चाहिए उन्होंने एक योजना का जिक्र करते हुए कहा कि "मनरेगा" एक ऐसी ही योजना है जो सरकार और शासन की योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक गरीब और मजदूर तक पहुंचाने का कार्य करती है। कोरोना के टाइम में जब समाज में लॉकडाउन के दौरान इतनी सारी अव्यवस्था फैल रही थी तो निश्चित रूप से मनरेगा ही गरीब मजदूर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों के लिए वरदान साबित हुई शासन को चाहिए इस तरह की और योजनाएं के क्रियान्वयन की दिशा में लगातार कार्य किए जाएं।

जौरा इकाई के संयोजक विकास वर्मा ने प्रश्न किया कि युवाओं में बेरोजगारी की स्थिति है उसके लिए क्या होना चाहिए ??

संदीप दीक्षित जी ने जवाब देते हुए कहा- निश्चित रूप से आज वर्तमान समय में बेरोजगारी की दर भारत में पिछले काफी समय से बहुत बड़ी है। मैं इस विषय पर कोई राजनीतिक टीका टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा क्यों कि यह आप लोगों का सामाजिक सरोकार का मंच है और हम भी "सामाजिक सरोकार के कार्यों में युवाओं की सहभागिता" विषय पर संवाद करने इस बेविनार के माध्यम से एकत्रित हुए हैं। लेकिन वर्तमान समय में निश्चित रूप से बेरोजगारी बहुत बड़ी है नई नौकरियां तो छोड़ो लोग जो नौकरियां पहले से ही कर रहे थे वह भी नोटबंदी के बाद से जानी शुरु हो गई थी। मैं किसी भी सरकार को दोष नहीं देना चाहता लेकिन बेरोजगारी दर केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण बड़ी है। मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा कि इस मामले में वर्तमान सरकार साबित हुई है।

युवा प्रबोधन मंच के मुरैना इकाई के समन्वयक संदीप बैसला ने प्रश्न किया कि हमारे यहां मुरैना में जातिवाद की एक बहुत बड़ी समस्या है इसके निदान के क्या उपाय हैं ? और उससे हम युवा कैसे बच सकते हैं ??

दीक्षित जी ने कहा कि- आज जातिवाद ग्रामीण स्तर पर एक बहुत बड़ी समस्या है युवाओं को चाहिए कि वह शिक्षा के माध्यम से अपने वैचारिक स्तर को देश-दुनिया से अपडेट करें। उन्होंने यह भी कहा के युवाओं को सोचना चाहिए अपनी नौकरी के बारे में, अपने शिक्षा के स्तर के बारे में अपने कौशल को बढ़ाने के बारे में ना की जाति के बारे में। निश्चित ही हमें अपने-अपने जाति धर्मो पर गर्व है लेकिन यह समाज में कटुता का कारण नहीं होना चाहिए। जातिवाद हमें हमेशा विकसित होने से रोकता है। शिक्षित युवाओं को चाहिए कि वह इन सब में न पड़ते हुए अपनी शिक्षा पर ध्यान दें अपनी  नैतिकता को बढ़ाने में ध्यान दें। मुझे मालूम चला है कि

View Details

मंच गतिविधि

View Details

समाचार

View Details

प्रिय आत्मन् .........तुम्हें खारिज़ करने के सभी कारण मौजू़द हैं। तुम्हारी सक्रियता भी तुम्हें खारिज करवा सकती है और निष्क्रियता भी। जवानी में ही तुम्हारा ज्ञानवृद्ध हो जाना, शरीरवृद्धों के लिए तुम्हें निरस्त करने का कारण हो सकता है। तुम आध्यात्मिक हो तो भी खारिज़ हो सकते हो। तुम खूब भौतिक भोगवादी हो तो भी लांछन तैयार हैं। बस तुम अपना दृष्टिपथ यानी विज़न कहाँ से लेते हो, यह महत्वपूर्ण है। तुम्हारी उठी हुई भुजाओं में कोई भी तख़्ती देकर चलता बनेगा। तुम्हारा ..........चिर