1*" अथातो भक्तिं व्याख्यास्याम:।।" 1."અથાતો ભક્તિં વ્યાખ્યાસ્યામ:" " 1.ATHATO BHAKTIM VYAAKHAASYAAMAH: ll
1*संयम से,सदाचारसे ईश्वर कृपा प्राप्त बुद्धि का सदुपयोग करके मनुष्य शरीर में परमात्मा के दर्शन संभव है।
भगवान श्री कृष्ण ने कहा," हे अर्जुन! तुम्हारा मन ही तुम्हारा सबसे अच्छा मित्र और सबसे बड़ा शत्रु है।तुम्हारा उत्थान-पतन करता है।और यही मन तुम्हारे पतन का कारण भी बनता है। इसके बाहर तुम्हारा कोई और शत्रु नहीं है ।"अपने मनका उत्थान कर उस पर विजय प्राप्त करना ही भगवद्गीता का सार है।जब मन परसे नियंत्रण जाता है,तब वह शत्रु की भांति व्यवहार करता है। यही मन जब जब अपने नियंत्रण में होता है, तो एक घनिष्ठ मित्र की भांति व्यवहार करता है।- गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी द्वारा एक व्याख्यान भगवद्गीता में से उद्धृत।
यही मूळ भागवतजीका स्वरूप है। ईसके पठन या श्रवण से पूरे भागवतका पुण्यफल प्राप्त होता है।
Bija Mantra Discription from Bhuvneshvari Bhagvatam and the potential power Shree Bhuvneshwari