I will upload here texts and meaning from the holy scripture Shree Bhagvad Gita As It Is written by Srila A. C. Bhaktivedatnta swami prabhupada.
अर्जुन ने कहा - हे कृष्ण! मैं प्रकृति एवं पुरुष, क्षेत्र एवं क्षेत्रीज्ञ तथा ज्ञान एवं ज्ञेय के विषय में जानने का इच्छुक हूं। श्री भगवान ने कहा - है कुंती पुत्र, यह शरीर क्षेत्र है और इस क्षेत्र को जानने वाला क्षेत्रज्ञ है
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को भगवद्गीता के दिव्य ज्ञान की गुरु परम्परा तथा दिव्य ज्ञान के बारे में विस्तार से उपदेश देते है।
भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को कर्मयोग के बारे में उपदेश देते हुए बताते है की कैसे कृष्णभावनामृत में रहकर मनुष्य को प्रकृति के अनुसार कर्म करना चाहिए।
कुरुक्षेत्र में अर्जुन के युद्ध करने से मना करने के बाद भगवान श्री कृष्ण उसे उपदेश देते हैं। आइए सुनते हैं।
इस अध्याय में दुर्योधन अपनी तथा युधिष्ठिर की सेना का अपने गुरु से वर्णन करेगा तथा सभी महारथी अपने-अपने शंखो को ध्वनित करके युद्ध का आह्वान करेंगे।
कृष्ण कृपा मूर्ति श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा लिखित यह पवित्र श्रीमद् भगवद् गीता यथारूप ग्रंथ हमारे जीवन में और जीवन जीने की कला में बहुत ही पारदर्शिता और सरलता ला देता है तो मैं यहां पर नियमित रूप से इस अध्याय को पाठ करुंगा। आप स्वयं इस का लाभ उठाएं एवं अपने मित्रों एवं परिवार गणों को भी प्रेरित करें। धन्यवाद
Here we will understand the Karma Yoga and its importance along with the implementation in real life.
In this episode lord Karishna will explain the meaning of duty, religion, essense of life and many more important concepts.
This episode will contain the history of Mahabharata like who was who and why the war was begin.