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“नाम साधना” की कुछ अनुभूतियों में से अपनेआप उभरा ये भक्तिगान, जिस तर्ज में उभरा उसी में गा कर इसे podcast करने की ये कोशिश है. आशा है ये गीत आपको भी आनंद दे, उतना ही जितना इसने और इसके तात्पर्य ने मुझे आनंदित किया है.

http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2009/05/chakar-tera-hun-kacrb.mp3

पल पल जपूँ मै तेरा नाम….!

पल पल जपूँ मै तेरा नाम,

चरणों में तेरे मेरा धाम ….

साँवरे, साँवरे …….!

तू ही है दाता मेरा,

तुझसे ही नाता मेरा,

औरों से है क्या काम,

चरणों में तेरे मेरा धाम ….

साँवरे, साँवरे …….!

जो काम सामने आये,

तूने ही हैं भिजवाये,

अर्पण करुँ मै तेरे नाम,

मेरे सारे काम …

चरणों में तेरे मेरा धाम ….

साँवरे, साँवरे …….!

मेरी न चिंता मुझको,

मेरी है चिंता तुझको….

मेरी जो चिंता तुझको,

क्यूँ मैं डरूँ भी किसीको,

चाकर तेरा हूँ भगवान ,

चरणों में तेरे मेरा धाम ….

साँवरे, साँवरे …….!

पल पल जपूँ मै तेरा नाम,

चरणों में तेरे मेरा धाम ….

साँवरे, साँवरे …….!

—- “ विश्व नन्द “ —-

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“नाम साधना” की कुछ अनुभूतियों में से अपनेआप उभरा ये भक्तिगान, जिस तर्ज में उभरा उसी में गा कर इसे podcast करने की ये कोशिश है. आशा है ये गीत आपको भी आनंद दे, उतना ही जितना इसने और इसके तात्पर्य ने मुझे आनंदित किया है. पल पल जपूँ मै तेरा नाम….! पल पल जपूँ […]

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The Hurried Marathi Manoos , Job Class , Swearing At Time , Swearing At Traffic August 2018 Went to the branch office Early enough and had a fruitful discussion After heated arguments On removal of footwear That has been a norm At all places that fellows work . The Site was Uran In the Raigad […]

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The Hurried Marathi Manoos , Job Class , Swearing At Time , Swearing At Traffic

August 2018

Went to the branch office

Early enough and had a fruitful discussion

After heated arguments

On removal of footwear

That has been a norm

At all places that fellows work .

The Site was Uran

In the Raigad district

I waited till another visitor

Was there to accompany me

On the journey to the site

Along with the driver

And a customer representative (Rep)

To the site .

We went by a van

And I soon realized

How much of a problem

A van can be

When without a jutting engine unit

And neither a jutting dicky unit

There was no place to keep the chart

That the Rep carried with him

To show the white chart

Exposing it to the Indian Soil

Highly fertile and growing .

During the journey ,

We made a few halts

One at the site office

And another at roadside shop

That sold eatables and sweets

And another at the actual site .

Tea was served at the site office

Quantity , you do not ask

Just enough to taste

And throw away the thick paper mug

Into the dustbin .

Snacks was taken at the roadside

Sweet shop and eatables Place .

Here was the first interruption

By the driver

When all the three had eaten

And I was still a few morsels away

From having my food

Or precisely an icecream

Prompt came the statement

“Hurry up” in an indicative gesture .

I did not say much then ,

And this was just before the halt

At the actual site .

At the actual site

The Rep started

Conversing in Marathi

With the visitor and customer with me

As he was a Maharashtrian too .

Now during the entire journey

Upto the site , he was busy

Chatting with the 2nd customer

In a Hurried Marathi Language

I believe with an intention

To leave me out of conversation .

The chat at the actual site office

Was another Loud Hurried Marathi conversation

Directed right at the right side of my mind

Without hardly a few inches separating and distancing

Me and Rep and then the 2nd customer

Right next to me on my right .

For a Novice or a Beginner Level in Marathi

It is really impossible to pick up a hurried Marathi language

Where the words are delivered at a rapid rate ,

And more importantly it is impossible to Pick up the language

When the Person is standing too close for comfort

So close , that it requires one to strain his or her eyes

In order to look at the speaker and make sense of what he says .

I moved some distance ,

The Rep. started calling me

Not giving me a moment’s silence

To be myself

And to be in myself

Again the same thing repeated ,

And then the 2nd customer

Was thinking to himself

And for himself

And the Rep. called out to him as well ,

Not even giving him a moment’s silence

To be in himself .

And the hurried Marathi talk repeated .

Then I moved further

And the 2nd customer

Stopped talking after sometime

And the rep. called out twice to me

I did not respond

He left towards the van

The 2nd customer was Pensive

I gestured to him to come to me

As I walked upto him .

I hardly got into conversation with him

When the Rep . interrupted twice in between

Swearing on time and traffic .

A job class man showed his class

Only as an attempt to bring down

The class of an educated mind

To the ultimate level of swearing

On time and traffic .

The concept of undivided attention

Is and has always been alien

To Semi Literate or an Uneducated mind .

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ना किसी गीतों मे धुन है

ना किसी बातों मे रस है

तेरे बिन लगता है जैसे,

वक्त भी ठहरा सा बस है

ना यहाँ मरने का गम है

ना यहाँ जीने की सुध है

तेरे बिन लगता है जैसे,

अब यहाँ पतझड़ की ऋतु है

To Be Continue…

http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2015/01/VB1.mp3

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ना किसी गीतों मे धुन है ना किसी बातों मे रस है तेरे बिन लगता है जैसे, वक्त भी ठहरा सा बस है ना यहाँ मरने का गम है ना यहाँ जीने की सुध है तेरे बिन लगता है जैसे, अब यहाँ पतझड़ की ऋतु है To Be Continue…

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गिफ़्ट हैंपर सी ज़िन्दगी ठहरी रंगारंग वर्क़ में धरी ठहरी जान के चाँद था लिया जिसको सिर्फ चमकीली तश्तरी ठहरी जिसकी हसरत ने बेक़रार रखा ख़्वाब ही वो हसीं परी ठहरी बैठ उड़ना था जिसपे वो कालीन एक मामूली सी दरी ठहरी चख के जिसको कि जी हुआ खट्टा ऐसी रंगीन रसभरी ठहरी जिनकी ज़िंदादिली […]

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http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2014/12/gift-hamper-2.wma

गिफ़्ट हैंपर सी ज़िन्दगी ठहरी

रंगारंग वर्क़ में धरी ठहरी

जान के चाँद था लिया जिसको

सिर्फ चमकीली तश्तरी ठहरी

जिसकी हसरत ने बेक़रार रखा

ख़्वाब ही वो हसीं परी ठहरी

बैठ उड़ना था जिसपे वो कालीन

एक मामूली सी दरी ठहरी

चख के जिसको कि जी हुआ खट्टा

ऐसी रंगीन रसभरी ठहरी

जिनकी ज़िंदादिली के चर्चे थे

रूह उनकी तो अधमरी ठहरी

कुछ न होना हवाना है इससे

शायरी सिर्फ शायरी ठहरी

पेड़ अंदर से खुश्क़ था पाया

शाख जिसकी हरी भरी ठहरी

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करती  हूँ महसूस अपने करीब तुम्हे ऐसे दिल के पास है धड़कन जैसे छूती हैं बहती हवाएँ मुझे ऐसे छू लिया हो तुमने ठंडे हाथों से जैसे उड़ती हुई लटें चेहरे पर मेरे सवाँर रहे हो तुम ऐसे फूलों के कोमल पल्लव पर सरसराती हैं तितलियाँ जैसे सुनकर हंसी तुम्हारी लगता है मुझे ऐसे चिड़ियों […]

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करती हूँ महसूस अपने करीब तुम्हे ऐसे दिल के पास है धड़कन जैसे छूती हैं बहती हवाएँ मुझे ऐसे छू लिया हो तुमने ठंडे हाथों से जैसे उड़ती हुई लटें चेहरे पर मेरे सवाँर रहे हो तुम ऐसे फूलों के कोमल पल्लव पर सरसराती हैं तितलियाँ जैसे सुनकर हंसी तुम्हारी लगता है मुझे ऐसे चिड़ियों ने बांधे हो पग मे घुंगरू जैसे आईने मे देखकर शर्माने लगी हूँ ऐसे देख रहे हो एकटक होकर मुझे तुम जैसे मिलने की चाह बढ़ती जा रही है ऐसे बढ़ती है सूरज की तपिश जैसे जाने ये क्या और हो गया मुझे कैसे राधा को था शाम से जैसे

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सारी दुनिया  का  यही   हाल  सही ….! सारी दुनिया  का  यही,  क्यूँ  है  ये  हाल  सही, बाँहों  में  और  कोई,   ख्यालों  में  और  कोई… ख्यालों  में  और  कोई,   बाँहों  में  और  कोई..…! यारों,   जिसे  कहते  वफ़ा,   वो  क्या  है  वफ़ा  सही, वफ़ा  ख़ुद  से  बेवफाई,   तो  ये  कैसी  वफा,  भाई. सारी  दुनिया  का  यही,  […]

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http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2013/10/Sari-duniya-ka-yahi-haal-sahii-031013.mp3 सारी दुनिया का यही हाल सही ….!

सारी दुनिया का यही, क्यूँ है ये हाल सही,

बाँहों में और कोई, ख्यालों में और कोई…

ख्यालों में और कोई, बाँहों में और कोई..…!

यारों, जिसे कहते वफ़ा, वो क्या है वफ़ा सही,

वफ़ा ख़ुद से बेवफाई, तो ये कैसी वफा, भाई.

सारी दुनिया का यही, क्यूँ है ये हाल सही,

बाँहों में और कोई, ख्यालों में और कोई ……!

जाने क्या है सही यहाँ, जाने क्या है गल्त यहाँ,

जाने क्या है बुरा यहाँ, जाने क्या है भला यहाँ,

जाने क्या है पुण्य यहाँ, जाने क्या है पाप यहाँ,

पाप क्यूँ दिल लुभाए, रुलाये क्यूँ भलाई……!

सारी दुनिया का यही क्यूँ है ये हाल सही,

बाँहों में और कोई, ख्यालों में और कोई…..!

जाने ये कैसे हुआ, झूट ही सच है यहाँ,

जिसे सच कहते सभी, वो तो सच है ही नहीं…..!

सारी दुनिया का यही, क्यूँ है ये हाल सही,

बाँहों में और कोई, ख्यालों में और कोई…

ख्यालों में और कोई, बाँहों में और कोई..……!

” विश्व नन्द “

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http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2013/10/Uljhan-me-pad-gaya-huun-021013.mp3

उलझन में पड़ गया हूँ ….!

उलझन में पड़ गया हूँ, ख़ुद ही समझ न पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

हमसब का दिल है गहरा, जैसे अथाह सागर,

सबकुछ छिपा यहीं है, अपने ही मन के अन्दर,

हीरे हैं मोती भी हैं, इन्हें खोज क्यूँ न पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

करते नहीं भरोसा इक दूसरे पे क्यूँ कर,

बेकार लड़ते मरते, सुंदर सी इस जमीं पर ,

मानव के गर्व का घर खाली न क्यूँ मैं पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

क्यूँ झूठ बोलकर हम, देते हैं ख़ुद को धोखा,

यूं झूठ बन गया है, सच से भी और सच्चा,

बुनियाद जो बुरी है, उसे खोद क्यूँ न पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

क्यूँ भूलते चले हम, इंसानियत का ज़रिया,

क्यूँ बेचते चले हैं, अच्छी नियत का पहिया,

ये कटी पतंग की मैं, क्यूँ न डोर खींच पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

क्यूँ न गीत लिख सका मैं, अबतक कोई भी ऐसा,

जो हर ह्रदय में भर दे, आदर्श, जोश नारा,

सच्चाई की डगर पर, हर दिल को मैं मिला दूँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

ये सब जो चल रहा अब, कुछ भी समझ न आए,

बेकार घर उजड़ते, कितनों की जान जाए,

आतंकवादियों को, कैसे खुदा दिखाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!..

उलझन में पड़ गया हूँ, ख़ुद ही समझ न पाऊँ,

मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!.

” विश्व नन्द “

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उलझन में पड़ गया हूँ ….! उलझन में पड़ गया हूँ, ख़ुद ही समझ न पाऊँ, मेरे दिल की धड़कने मैं, क्या गाऊँ क्या सुनाऊँ…….!. हमसब का दिल है गहरा, जैसे अथाह सागर, सबकुछ छिपा यहीं है, अपने ही मन के अन्दर, हीरे हैं मोती भी हैं, इन्हें खोज क्यूँ न पाऊँ, मेरे दिल की धड़कने मैं, […]

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मेरा यह  इक   पुराना  रचा दार्शनिक गीत इसके नए audio में गाकर प्रस्तुत करने में खुशी महसूस कर रहा हूँ …. . सुकून आ गया है  थोडा……..! अब सुकून आ गया है जिन्दगी मे थोडा, जब से मैंने औरों संग दौड़ना है छोडा… जब से मैंने औरों जैसा दौड़ना है छोडा… अब तो वक्त […]

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मेरा यह इक पुराना रचा दार्शनिक गीत इसके नए audio में गाकर प्रस्तुत करने में खुशी महसूस कर रहा हूँ ….

http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2013/09/Sukoon-aa-gaya-thoda-190913.mp3 .

सुकून आ गया है थोडा……..!

अब सुकून आ गया है जिन्दगी मे थोडा,

जब से मैंने औरों संग दौड़ना है छोडा…

जब से मैंने औरों जैसा दौड़ना है छोडा…

अब तो वक्त मिल रहा है, कुछ तो ख़ुद के वास्ते,

सोचने का हूँ मैं कौन, कौन से हैं रास्ते.

लग रहा है सब नया, जो दृष्टि कुछ नयी मिली,

पहले जैसी दुनिया भी है, लगती अब नई नई ……

भा रहा निसर्ग जैसे स्वर्ग ही यथार्थ ये,

मुक्त मन जो हो गया है, व्यर्थ के स्वगर्व से,

मुक्त मन जो हो गया है, अर्थहीन स्वार्थ से…..

वक्त जो गुजर गया है, उसकी न परवाह है,

हाथ मे समय बचा है, पल पल उससे प्यार है.

हूँ अलिप्त मैं मगर, सर्व में जुटा हुआ,

दलदलों में देख कमल, सुंदर सा जी रहा……..

अब जो राहें चल रहा हूँ, कुछ तो ख़ुद चुनी हुईं,

हर छलांग पे यहाँ हैं, मंजिलें नयीं नयीं .

बाजी ख़ुद से है यहाँ, इंसान पूर्ण बनने की,

दिन-ब-दिन नया नया प्रयोग, ख़ुद ही करने की.

है कठिन ये राह फिर भी चलने में सुकून है,

ना किसीसे दोस्ती न दुश्मनी की शर्त है.

पास कुछ नहीं जो मेरे, खोने का मैं भय धरूँ,

ज्ञान ये हुआ कि ज्ञान ही बटोरता फिरूं……

ये है ऐसी राहें, जिनको भी मेरी तलाश है,

मंजिलें ये ऐसी, जिनको मेरा इंतजार है,

मंजिलें ये ऐसी जो मेरे ही आसपास हैं……

अब सुकून आ गया है जिन्दगी मे थोडा,

जब से मैंने औरों संग दौड़ना है छोडा…

जब से मैंने औरों जैसा दौड़ना भी छोडा……

“ विश्व नन्द “

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स्व. श्री सचिनदेव बर्मन दा के रचे सुन्दर फिल्म गीत ” हम हैं राही प्यार के” की तर्ज़ पर उभरा हुआ यह मेरा इक पुराना भक्तिगीत इसके नए audio सहित सादर करने में बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ ….

http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2013/09/Ham-to-mast-ho-liye-150913.mp3 .

हम तो मस्त हो लिए……! (भक्तिगीत)

.

हम है राही प्यार के, हम तो मस्त हो लिए,

“नाम” में प्रभु के हम, विश्वमन में हो लिए,

“नाम” में प्रभु के हम, मस्त हो के जी रहे……!

.

चिंता कुछ हमें नहीं, ना हैं हम अस्वस्थ भी,

प्रभु के भेजे काज हैं, और है पास वक्त भी,

प्रेमद्रष्टि से ये सब जग निहारते चले,

“नाम” में प्रभु के हम, विश्वमन में हो लिए,

“नाम” में प्रभु के हम, मस्त हो के जी रहे……!

.

भक्ति में ये शान्ति और मन में है आनंद सा,

प्रभु के “नाम” का नशा, जग लगे है स्वर्ग सा,

देहबुद्धि के परे, आत्मबुद्धि से जुटे,

आत्मज्ञान में रमे,

“नाम” में प्रभु के हम, विश्वमन में हो लिए,

“नाम” में प्रभु के हम, मस्त हो के जी रहे……!

.

विश्वमन ही शक्ति है, विश्वमन ही ज्ञान है,

सूक्ष्म से अनंत तक विश्वमन ही व्याप्त है,

सत्य शिवम् सुन्दरम, विश्वमन ही तो है,

विश्वमन का स्पर्श हम, भक्ति में ये पा रहे,

“नाम” में प्रभु के हम, विश्वमन में हो लिए,

“नाम” में प्रभु के हम, मस्त हो के जी रहे……!

“नाम” में प्रभु के यूं, मस्त हो के गा रहे…..!

.

” विश्व नन्द “

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स्व. श्री सचिनदेव बर्मन दा के रचे सुन्दर फिल्म गीत ” हम हैं राही प्यार के” की तर्ज़ पर उभरा हुआ यह मेरा इक पुराना भक्तिगीत इसके नए audio सहित सादर करने में बहुत खुशी महसूस कर रहा हूँ …. . हम तो मस्त हो लिए……! (भक्तिगीत) . हम है राही प्यार के, हम तो […]

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http://p4poetry.com/wp-content/uploads/2013/08/Mera-Man-Chanchal-Hai-260813.mp3 मेरा मन चंचल है ……! (गीत) .

मेरा मन चंचल है, मेरे पास न आना,

तेरा हुस्न ही ऐसा रसीला, हुआ दिल ये दीवाना,

मेरे पास न आना …..!

तू है बाला भोलीभाली, बड़ी बड़ी सी अँखियोंवाली

तेरी चाल भी है मतवाली, मेरे पास न आना ……!

हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

तू है नाजुक एक कली सी, मुसकाती फूलों जैसी,

मेरा मन मतवाला भंवरा, मेरे पास न आना ……!

हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

चंदन का बदन ये तेरा, नटखट सा गहुवे रंग का,

मुझे देख न यूं शरमाना, मेरे पास न आना ……!

हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

तुझे देख के मेरा मुझपर, विश्वास ही खो सा गया है,

मुझ पर यूं न बिजली गिराना, मेरे पास न आना ……!

हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

कहता हूँ बड़ी मुश्किल से, मिन्नत करता हूँ तुझसे,

मुझे पागल यूं न बनाना, मेरे पास न आना ……!

हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना ……!

मेरा मन चंचल है, मेरे पास न आना,

तेरा हुस्न ही ऐसा रसीला, हुआ दिल ये दीवाना,

मेरे पास न आना …..!

” विश्व नन्द “

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मेरा मन चंचल है  ……! (गीत) . मेरा मन चंचल है, मेरे पास न आना, तेरा हुस्न ही ऐसा रसीला, हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न आना …..! तू है बाला भोलीभाली, बड़ी बड़ी सी अँखियोंवाली तेरी चाल भी है मतवाली, मेरे पास न आना ……! हुआ दिल ये दीवाना, मेरे पास न […]