“सुई धागा” हिन्दी सिनेमा पर आधारित एक विचार मैं पहले भी आपके समक्ष रख चुका हूँ। इसी सिनेमा से प्रेरित एक दूसरा विचार रखना चाहूँगा। नायक गरीब है, और नौकरी छोड़ कर अपना सिलाई का काम शुरू करने की सोचता है। वह सरकार की मुफ्त सिलाई मशीन स्कीम में हिस्सा लेता है जिसमें समय सीमा […]
हाल ही मे मैंने हिन्दी सिनेमा “सुई धागा” देखी। इस फिल्म का नायक और नायिका शादीशुदा हैं और निचले मध्यम वर्ग के हैं। दोनों में आपसी प्रेम तो दूर की बात, एक दूसरे से मिलने या बात करने का मौका तक नहीं मिलता है। नायक एक दुकान पर नौकरी करता है और साथ में मसखरी […]
मैंने अपना प्रॉफेश्नल करियर तीन दशक पहले भारतीय रेल से शुरू किया था। शुरू से ही मैंने पाया कि नैतिक मूल्यों के पालन पर बहुत ज़ोर रहा है। जैसे ईमानदारी, सत्यनिष्ठा, विश्वसनीयता, पारदर्शिता, सरलता, सहनशीलता, विनम्रता इत्यादि। देश के संविधान के अंतर्गत ये नैतिक मूल्य देश के सर्वोच्च पद, राष्ट्रपति के पद से लेकर सबसे […]
महात्मागांधी ने कहा है कि टहलना कसरतों की रानी है। स्कूल की दीवारों पर लिखे कई महापुरुषों के विचारों मे से यह एक विचार था जिसे मैं एक तरीके से हमेशा खारिज कर देता था। मुझे समझ ही नहीं आता था कि टहलने जैसा बोरिंग और रूटीन कार्य कैसे इतना महत्वपूर्ण हो सकता है। टहलना […]